रविवार, 17 जनवरी 2010

राजनीति में एक अध्याय का अंत


दशक के अंतिम साल कि सबसे दुखद घटना। माकपा के सबसे वरिष्ठ नेता ज्योति बसु नहीं रहे। इनके बारे में अभी कुछ लिखने का दिल नहीं कर रहा क्योंकि आंखे आंसुओं से भीगी हैं और दिल व्यथित। चर्चा अगली बार करेंगे।

1 टिप्पणी:

Randhir Singh Suman ने कहा…

कामरेड़ ज्योति बसु को लाल सलाम